प्रारंभ

महाभारत के युद्ध के बाद - भगवान श्रीकृष्ण परमधाम लौट गए, द्वारिका नगरी समुद्र में पानी बढ़ने से डूब गई। [1] पांडवों ने शासन किया और फिर परीक्षित को राजा बनाकर हिमालय पर तपस्या करने चले गए। [2]


परीक्षित के शासन से कलियुग का आरंभ माना जाता है। [3] [4]

धर्म का क्षरण
धर्म के चार अंग वर्ष और घटनाएं
तप -- यह कम से कमतर होता चला गया है।
दया १२०० इस्लाम में दया समाप्त हो गई, उसका स्थान क्रूरता ने ले लिया। असैनिक पुरुषों की गर्दन काटी जाती और महिलाओं का बलात्कार होता।
दान १८२० चैतन्य महाप्रभु के समय तक पाठशालाएं चलती थीं।
पाठशाला और गुरुकुल दान और भिक्षा से चलते थे।
सत्य १९२० ब्रिटिश काल में मैकाले शिक्षा के प्रचार से धर्म-अधर्म का विचार कम होता गया।
सत्य का आचरण भी घटता गया।

धर्म के चारों अंगों का चौथा अंश रह जाता है। अंत आते-आते उसका भी लोप हो जाता है।[5]

संदर्भ

  1. श्रीमद भागवत, एकादश स्कंध, अंतिम अध्याय, श्लोक २३, गीताप्रेस गोरखपुर
  2. श्रीमद भागवत, एकादश स्कंध, श्लोक २६, गीताप्रेस गोरखपुर
  3. श्रीमद भागवत, द्वादश स्कंध, अध्याय प्रथम, श्लोक ८, गीताप्रेस गोरखपुर
  4. श्रीमद भागवत, द्वादश स्कंध, अध्याय दो, श्लोक २९,३०,३१, गीताप्रेस गोरखपुर
  5. श्रीमद भागवत, द्वादश स्कंध, अध्याय तीन, श्लोक २४, गीताप्रेस गोरखपुर