स्वामी विवेकानंद गुरू की खोज में दो प्रश्न पूछतें थे
१. क्या आपने भगवान को देखा है?
२. क्या मुझे दिखा सकते हैं?
परमहंस रामकृष्ण ने पहले के उत्तर में - हां कहा था।
दूसरे के उत्तर में सामने बिठा कर अपने पैर के अंगूठे से इनके हृदय पर स्पर्श कर दिया था। विवेकानंद जी की आंखों के आगे प्रकाश ही प्रकाश हो गया था और वह कुछ देर के लिए अचेत हो गए थे।
यही दो कसौटियां गुरू बनाने के लिए प्रयोग उचित है।
नोट - परमहंस रामकृष्ण जी अनपढ़ थे।
यह कठिन सिद्धि है। सोपान परंपरा का विस्तार जानें।
निकटतम इतिहास में
प. गोपीनाथ कविराज जी ने निकटतम इतिहास के कई साधकों और सिद्धों का विस्तार से वर्णन किया है। साधु दर्शन एवं सत्प्रसंग - भाग 1-2, भाग 3, भाग 4
गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागों पायं बलिहारी गुरू आपनो, गोविंद दियो मिलाय - संत कबीरदास
मूल अंग्रेजी My master said, "From this day on, don't lie. Practice this rule faithfully for the next three months." अनुवाद मेरे गुरु ने कहा - आज से झूठ मत बोलना। अगले तीन महीने तक नियम से इसका पालन करना।
स्वामी राम के गुरूजी और एक जिज्ञासु को पहला उपदेश Living with the Himalayan Masters, by Swami Rama, पृष्ठ 59 से
अन्य शब्द
| योगी | योग की सोपान परंपरा में चारों सीढ़ी पार करने वाले को योगी कहते हैं। यह गुरू से कमतर होता है क्योंकि गुरु में करुणा भी होती है, जिससे दूसरों का कल्याण हो पाता है। |
| भक्त | यह योग के सोपान परंपरा की तीसरी सीढ़ी है। |
| ऋषि | यह मंत्रदृष्टा होते हैं। यह योग के सोपान परंपरा की दूसरी सीढ़ी है। |
| आचार्य | देह के अभिमान से ऊपर उठ चुके हुए। |
| पंडित | साधना में रत को पंडित कहते हैं। |
| विद्वान | वेद की अच्छी जानकारी रखने वाले। |
| पुजारी | पूजापाठ कराने वाले। |
| जानकार | ग्रंथों की अच्छी जानकारी रखने वाले। |
| कथावाचक | प्रचलित ग्रंथों को सरल कर के सुनाने वाले। |
| शिक्षक | पाठशाला / स्कूल / कालेज में पढ़ाने वाले। |