आंदोलन कैसे करें

जंतर मंतर पर शिक्षा मंत्री के त्यागपत्र के लिए आंदोलन
- 37 दिन लंबा खिंचा
- लाखों लोग
- कई राज्यों से जंतर मंतर पर जुटे
- पुलिस पिटाई में चोटें

क्या सूझ-बूझ से इससे कम दिनों में, कम लोगों में - कम खर्च और कम चोटों में - यही परिणाम पाया जा सकता है?

100% हां।

आंदोलन सही जगह पर करने से। जिसे वोट दिया है उसके घर के सामने प्रदर्शन करके। इसके लिए कोई सरकारी आज्ञा नहीं चाहिए। जन-प्रतिनिधि के घर पर जनता नही जाएगी तो कहां जाएगी।

उदाहरण-

१. परवां गांव में पक्का पुल

- बार बार लोग कहते कि पास के रेलवे स्टेशन पर या हाई-वे पर चक्का जाम करते हैं। हर बार मैं यही कहता कि वहां से तो टैक्स देने वाली जनता गुजरती है। आम जनता को परेशान नहीं करना है। आंदोलन होगा तो केवल विधायक और सांसद के घर के सामने।

२. उत्तराखंड में नौकरी ज्वाइनिंग

- उन दिनों मैं जनता मालिक ऐप चलाता था। एक युवा ने ऐप में से नंबर लेकर मुझे फोन किया।
बताया कि - सेलेक्शन हो चुका है पर ज्वाइनिंग नहीं मिल रही है।
मैंने पूछा - कहां धरना देते हो?
बताया कि - देहरादून के राम लीला मैदान में। हम दस-बारह लोग रहते हैं। मैंने कहा कि - कल मेरे कहने से विधायक के घर के सामने बैठो।
एक महीने बाद मैनें फोन करके पूछा कि - क्या हुआ
उसने खुशी से बताया कि - आधे घंटे में ही विधायक का सचिव आकर हमारी चिट्ठी ले गया कि आपका काम हो जाएगा। यहां मत बैठिए। ज्वाइनिंग भी हो चुकी थी और पहली सैलरी भी खाते में आ चुकी थी।

३. अन्ना आंदोलन

अन्ना आंदोलन के अंतिम दो-तीन दिन में भी सांसद और विथायकों के घर के सामने धरना-प्रदर्शन हुआ था।

सोच कर देखिए -

- सांसद और विथायक का घर पास में होता है। ना तो दूर जाना है, ना अधिक खर्च करना है।
- घर के अंदर जन-प्रतिनिधि के बच्चे और घर के बूढ़े भी होते हैं। वह भी सवाल पूछने लगते हैं कि गेट के बाहर लोग क्यों जुटे हैं। वह परेशान हैं।
- इससे बहुत दबाव पड़ता है। दूसरों से झूठ बोलना आसान होता् है पर घरवाले झट से पकड़ लेते हैं।
- घर में ही कमेडी शुरू हो जाती है।

इससे बहुत जल्दी परिणाम मिलते हैं।

जनता मालिक पुस्तक में भी यह उदाहरण लिखे हैं।